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देखें अपने हाथों की रेखाएं और जानें कैसा रहेगा जीवन

1. हस्त रेखा से जानें अपना कल

हस्त रेखा से जानें अपना कल

हस्त रेखा विज्ञान को सामुद्रिक शास्त्र भी कहते हैं। इस पद्धति में हथेलियों की बनावट उंगलियों के आकार-प्रकार के साथ हथेलियों पर उभरी रेखाओं के आधार पर भविष्य के बारे में जाना जाता है। हाथों में दिखाई देने वाली रेखाएं और हमारे भविष्य का गहरा संबंध है. इन रेखाओं का अध्ययन किया जाए तो हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं की भी जानकारी प्राप्त हो सकती है. वैसे तो हाथों की सभी रेखाओं का अलग – अलग महत्व होता है. किसी व्यक्ति को कितना मान – सम्मान और पैसा मिलेगा यह भी रेखाओं से मालुम हो जाता है. इस पद्धति में यूं तो हथेलियों की सभी रेखाओं का अच्छे तरीके से अध्ययन किया जाता है, पर कुछ मुख्य रेखाएं इस प्रकार हैं…..

2. जीवन रेखा

जीवन रेखा

यह रेखा हस्तरेखा विज्ञान या सामुद्रिक शास्त्र में बेहद अहम लकीर मानी जाती है क्योंकि इसी से आयु, उपलब्धियां जीवन, मृत्यु, संकट, दुर्घटना का पता लगाया जाता है। यह रेखा अंगूठे और तर्जनी के मध्य से निकलती हुई हथेली के निचले भाग यानि मणि बंध तक आती है। एक स्वस्थ लकीर जहां अच्छे जीवन का संकेत देती है, वहीं टूटी फूटी रेखा, कटी रेखा, अधूरी रेखा या रेखा पर गोल चक्कर का निशान (यानी द्वीप) शुभ संकेत नहीं है।

3. मस्तिष्क रेखा

मस्तिष्क रेखा

जीवन रेखा के साथ मस्तिष्क रेखा भी निकलती है। ये कभी सीधी तो कभी नीचे की तरफ जाती है। कभी-कभी यह रेखा जीवन रेखा के साथ न निकलकर कुछ ऊपर से निकलती है। इस रेखा से मानसिक क्षमता, बुद्धि, योग्यता, मानसिक स्तर, वैचारिक क्षमता वगरह का पता लगता है ।

4. मस्तिष्क रेखा

मस्तिष्क रेखा

यह रेखा जितनी निर्दोष होती है, उतनी श्रेष्ठ मानी जाती है। आधी अधूरी रेखा मानसिक क्षमता में कमी की ओर इशारा करती है। कुछ नीचे झुकी रेखा भावुकता प्रदान कर कला, संगीत व साहित्य में रूचि को प्रकट करती है।

5. ह्रदय रेखा

ह्रदय रेखा

छोटी उंगली के नीचे से आरंभ होकर तर्जनी उंगली की तरफ बढ़ने वाली रेखा ह्रदय रेखा कहलाती है। यह रेखा दिल की शक्ति, संवेदनशीलता, स्वभाव, गुण, अवगुण इत्यादि की ओर इशारा करती है। नीचे झुकी हुई रेखा अंतर्मुखी, साहित्य-संगीत प्रिय व कलाकर बनाती है। ऊपर की ओर जाती रेखा, तकनीकी विद्या का जानकार व दिमाग से कार्य करने की क्षमता को प्रकट करती है।

6. भाग्य रेखा

भाग्य रेखा

मणि बंध यानि हथेली के नीचे से निकलकर जो रेखा मध्यमा उंगली के निकट जाती है, वह फेट लाइन यानी भाग्य रेखा कहलाती है। स्पष्ट भाग्य रेखा वाले लोग भाग्यशाली होते हैं। हथेली के नीचे से निकलने वाली रेखा पारिवारिक समर्थन से भाग्योदय की ओर इशारा करती है। वहीं, चंद्र पर्वत से निकलने वाली रेखा हमारे सेल्फ फेट होने की कहानी कहती है।

7. कहां होती है विवाह रेखा

कहां होती है विवाह रेखा

विवाह रेखा लिटिल फिंगर (सबसे छोटी अंगुली) के नीचे वाले भाग में होती है. कुछ लोगों के हाथ में एक विवाह रेखा होती है तो कुछ लोगों के हाथों में एक से अधिक. सबसे छोटी अंगुली के नीचे वाले क्षेत्र को बुध पर्वत कहते हैं. बुध पर्वत के अंत में कुछ आड़ी गहरी रेखाएं होती हैं. यह विवाह रेखाएं कहलाती है.ऐसा माना जाता है कि जिन विवाह रेखाओं की संख्या होती है उस व्यक्ति के उतने ही प्रेम प्रसंग हो सकते हैं.

8. कहां होती है विवाह रेखा

कहां होती है विवाह रेखा

यदि यह रेखा टूटी हो या कटी हुई हो विवाह विच्छेद की संभावना होती है. साथ ही यह रेखा आपका वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा यह भी बताती है. यदि रेखाएं नीचे की ओर गई हुई हों तो दांम्पत्य जीवन में आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.यदि विवाह रेखा के आरंभ में दो शाखाएं हो तो उस व्यक्ति की शादी टूटने का भय रहता है.

9. कहां होती है विवाह रेखा

कहां होती है विवाह रेखा

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार विवाह रेखा से किसी व्यक्ति भी व्यक्ति के विवाह और प्रेम प्रसंग पर विचार किया जाता है.यदि किसी स्त्री के हाथ में विवाह रेखा के आरंभ में द्वीप चिन्ह हो तो उसका विवाह किसी धोखे से होगा, ऐसी संभावनाएं रहती हैं. यदि बुध पर्वत से आई हुई कोई रेखा विवाह रेखा को काट दे तो उस व्यक्ति का वैवाहिक जीवन परेशानियों भरा होता है.

10. कहां होती है विवाह रेखा

कहां होती है विवाह रेखा

यदि विवाह रेखा रिंग फिंगर (अनामिका) के नीचे सूर्य रेखा तक गई हो तो उस व्यक्ति का विवाह किसी विशिष्ट व्यक्ति से होता है.विवाह रेखा पर विचार करते समय शुक्र पर्वत (अंगूठे के नीचे वाला भाग शुक्र पर्व कहलाता है. इसका क्षेत्र जीवन रेखा तक होता है.) पर भी विचार करना चाहिए.दोनों हाथों की सभी रेखाओं और हाथों की बनावट का भी व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य पर प्रभाव पड़ता है. अत: इस हाथों का सही – सही अध्ययन किया जाना चाहिए.

11. अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

अँगुलियाँ छोटी-बड़ी, मोटी-पतली, टेढ़ी-मेढ़ी, गाँठ वाली तथा बिना गाँठ वाली कई प्रकार की होती हैं. प्रत्येक अँगुली तीन भागों में बँटी होती है, जिन्हें पोर कहते हैं. पहली अँगुली को तर्जनी, दूसरी अँगुली को मध्यमा, तीसरी अँगुली को अनामिका तथा चौथी अँगुली को कनिष्ठा कहा जाता है.

12. अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

प्रत्येक अँगुली की अलग-अलग परीक्षा की जाती है. लम्बाई के हिसाब से अधिक लम्बी अँगुलियों वाला व्यक्ति दूसरे के काम में हस्तक्षेप अधिक करता है. लम्बी और पतली अँगुलियों वाला व्यक्ति चतुर तथा नीतिज्ञ होता है. छोटी अँगुलियों वाला व्यक्ति अधिक समझदार होता है. बहुत छोटी अँगुलियों वाला व्यक्ति सुस्त, स्वार्थी तथा क्रूर प्रवृति का होता है.

13. अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

जिस व्यक्ति की पहली अँगुली यानी अँगूठे के पास वाली अँगुली बहुत बड़ी होती है वह व्यक्ति तानाशाही अर्थात् लोगों पर अपनी बातें थोपने वाला होता है. यदि अँगुलियों मिलाने पर तर्जनी और मध्यमा के बीच छेद हो तो व्यक्ति को 35 वर्ष की उम्र तक धन की कमी रहती है.

14. अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

यदि मध्यमा और अनामिका के बीच छिद्र हो तो व्यक्ति को जीवन के मध्य भाग में धन की कमी रहती है. अनामिका और कनिष्का के बीच छिद्र बुढ़ापे में निर्धनता का सूचक है. जिस व्यक्ति की कनिष्ठा अँगुली छोटी तथा टेड़ी – मेड़ी हो तो वह व्यक्ति जल्दबाज तथा बेईमान होता है.

15. अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

अँगुलियों के द्वारा किसी का भी केरेक्टर जानें

यदि अँगुलियों के अग्र भाग नुकीले हों और अंगुलियों में गाँठ दिखाई न दे तो व्यक्ति कला और साहित्य का प्रेमी तथा धार्मिक विचारों वाला होता है. काम करने की क्षमता इनमें कम होती है. सांसारिक दृष्टि से ये निकम्मे होते हैं.

16. जानिए अपने हाथों में भविष्य देखने का खास तरीका

जानिए अपने हाथों में भविष्य देखने का खास तरीका

ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसी विद्याएं बताई गई हैं जिनसे किसी भी व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान को देखा जा सकता है. इन्हीं विद्याओं में से एक है हस्तरेखा. हाथों की रेखाओं में हमारा भविष्य छुपा होता है और हथेली का अध्ययन करने पर किसी भी व्यक्ति के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है.हस्तरेखा के अनुसार हाथों का परीक्षण सावधानी से करना चाहिए. .

17. जानिए अपने हाथों में भविष्य देखने का खास तरीका

जानिए अपने हाथों में भविष्य देखने का खास तरीका

सभी रेखाओं का अपना अलग महत्व है और वे अन्य रेखाओं के शुभ – अशुभ प्रभाव को कम या ज्यादा करने में सक्षम होती है. इसी वजह से इन रेखाओं को देखने के लिए मैग्नीफाइन ग्लास का प्रयोग करना चाहिए

18. जानिए अपने हाथों में भविष्य देखने का खास तरीका

जानिए अपने हाथों में भविष्य देखने का खास तरीका

हस्तरेखा से भविष्य देखने के लिए सबसे पहले अंगुलियों, अंगूठे और हथेली की बनावट देखनी चाहिए. फिर बायां हाथ देखें, इसके बाद दायां हाथ. अब दोनों हाथों की रेखाओं और बनावट में अंतर समझें. अब हाथों की हर भाग हथेली, करपृष्ठ, नाखुन, त्वचा, रंग, अंगुलियां, अंगूठा तथा कलाई आदि का परीक्षण करें. अंगूठा देखें इसके बाद हथेली की कठोरता या मृदुता देखें. फिर अंगुलियों पर ध्यान दें और सभी ग्रह क्षेत्रों का अध्ययन करें. इसके बाद सभी रेखाओं को एक – एक करके ध्यानपूर्वक देखें और अध्ययन करें. हाथों का अध्ययन जितनी गहराई और ध्यान से किया जाएगा, भविष्यफल उतना ही सटीक बैठेगा.

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