Miracles of God Stories in Hindi

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भगवान पर विश्वास

शीला थी तो एक साधारण लड़की पर थी माँ लक्ष्मी की अनन्य भक्त, दिन-रात, सुबह-शाम माँ को अपने हर काम में सम्मिलित करती। उसकी आस्था अडिग थी और भक्ति दृढ़। अचानक उसके मन में यह विचार आया कि जब माँ मंदिर में स्थापित एक मूरत के रूप में परेशानियों का समाधान करती हैं या फिर सुख या आनंद के पल में अपने भक्तों का धन्यवाद कबूल करती हैं, तो माँ को कितना सुकून मिलता होगा!
उसने सोचा कि काश! मैं भी एक बार इस कुछ-भी, कैसे-भी, और कभी-भी निर्णय लेने कि ताकत का अनुभव कर पाती। काश! मैं भी लोगों का भाग्य एक पल में बदल पाती! काश! 
ख्याल तो ख्याल होता है पर जब वो हकीकत का रूप ले ले तो आनंद ही निराला होता है। 
माँ से तो कुछ छिपा नहीं है, वो शीला कि इच्छा को भी सुन रही थीं। उन्होंने शीला के सपने में आकर उसे समझाया कि भगवान बनाना इतना आसान नहीं है, रोज़ अनगिनत लोगों के सुख-दुःख को सुनना पड़ता है, रोज़ उनकी समस्याओं का समाधान करना पड़ता है, हर निर्णय से पहले बार-बार सोचना पड़ता है।
पर शीला की प्रबल इच्छा के आगे माँ को झुकना ही पड़ा और उन्होंने शीला को एक दिन के लिए मंदिर में देवी बना दिया और  निर्देश दिया कोई निर्णय न बदलने का। शीला आज प्रसन्न थी क्योंकि एक दिन के लिए भगवान जो बन रही थी।दिन की शुरुवात हुई सुबह पांच बजे। लोग आए पूजा की, प्राथना की, अपना सुख-दुःख बताया। वो शांत भाव से सब सुन रही थी और मन ही मन प्रसन्न हो रही थी कि इतना अच्छा लगता है जब कोई आपको इम्पोर्टेंस देता है।

Miracles of God Stories in Hindi

समय तो गतिमान है अपनी गति से बढ़ रहा था। सुबह 5 बजे से शाम के 5 बज गए। तभी एक बहुत अमीर व्यक्ति पूजा करने आया। वो माँ वैष्णो देवी की यात्रा पे जाने से पहले माँ को प्रणाम करने आया था।कुछ तो उसे यात्रा कि जल्दी थी और कुछ उसका ध्यान बगल में खड़े एक निर्धन व्यक्ति पे था जो बहुत परेशान दिख रहा था कि वो अपना पैसों से भरा पर्स वहीं भूलकर चला गया।
शीला सब एक मूरत बनी देख रही थी, और करती भी क्या? वो कुछ कर नहीं सकती थी। पर यह क्या? जब पास में खड़े एक निर्धन व्यक्ति ने अपनी आंख खोली तो अपने सामने पैसे से भरा पर्स पाया। फिर क्या था उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उसने पर्स उठाया, देवी को धन्यवाद दिया और चल दिया।
शीला को लगा की ये तो अनर्थ हो गया, किसी की मेहनत की कमाई किसी और के पास चली गयी और दूसरे व्यक्ति ने वह पर्स उठा भी लिया, उसे उस निर्धन व्यक्ति पर बहुत गुस्सा आया। अब शीला चुप न रह सकी और वो बाहर अपने इंसानी रूप में आयी तथा एक पुलिस वाले को सारी कथा सुना दी। फिर क्या था, पुलिस ने उस निर्धन व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया, जेल में डाल दिया और पर्स उस धनवान व्यक्ति को वापस कर दिया। शीला बहुत खुश थी और सोच रही थी माँ उसके इस कार्य पर कितना प्रसन्न होंगीं।
समय तो गतिमान है और अपनी गति से बढ़ रहा था। माँ सूरज ढलने के बाद आयीं पर प्रसन्न न हुईं। बोलीं 
'यह तूने क्या किया? उस धनवान व्यक्ति का पर्स मैंने इसलिए उससे भुलवाया था क्योंकि अगर पर्स उसके पास रहता तो वह रास्ते में रुक कर कुछ खाने के लिए खरीदता जिससे उसे कोरोना इन्फेक्शन हो जाता और फिर उसकी मृत्यु हो जाती, पर अभी उसका समय पूरा नहीं हुआ है क्योंकि उसका काम धरती पर पूर्ण नहीं हुआ है। दूसरी तरफ, वह निर्धन व्यक्ति जो मेरा बहुत बड़ा भक्त है और वो अपनी एकलौती संतान का इलाज करने में असमर्थ है इसलिए वह मुझसे अपनी बेटी की दवा के लिए पैसे मांगने आया था। उस पर्स का धन उसकी बेटी के इलाज के काम आता और उसकी बेटी बच जाती। पर तूने दोनों काम को उलट दिया और मेरे दोनों भक्तों को संकट में डाल दिया!''
हम अपनी समझ से चीजों का विश्लेषण कर लेते हैं और यह भूल जाते हैं कि भगवान जो करते हैं उसके पीछे कोई कारण अवश्य होता है। आज दुनिया में कोरोना महामारी है, आज ना इसका कोई इलाज है और ना ही कोई वैक्सीन। कल कोरोना महामारी नहीं रहेगी, कल हम फिर से पहले जैसे जीवन जी सकेंगे। इस आज और कल के बीच में ईश्वर खड़े हैं। जरूरत है इस तथ्य को समझने की। जरूरत है यह स्वीकारने की कि भगवान के हर कार्य के पीछे उनकी मर्जी छुपी होती है। हमें बस अपने विश्वास को उनके कार्यों से जोड़ना है। 
घडी है संकट की,हारिये न हिम्मत,करिये विश्वास परमेश्वर पर।रात गहरी जरूर है,पर नई सुबह भी आएगी,अपने साथ कोरोना मुक्त दुनिया लाएगी।
 
 
 
 

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